
हर्षछिकारा
“मेरा संघर्ष ही मेरा परिचय है”

हर संख्या के पीछे एक चेहरा
किसी बेटी की मुस्कान, किसी माँ की दुआ, किसी मरीज़ की लौटती साँस, किसी किसान का मिला हक़। ये आँकड़े नहीं, आशीर्वाद हैं।


सेवा-कार्यों के आँकड़े टीम हर्ष छिकारा के रिकॉर्ड से; चुनाव आँकड़े भारत निर्वाचन आयोग से; सोशल मीडिया आँकड़े अक्टूबर 2026 तक।
एक कहानी, जो मिट्टी से शुरू हुई
झज्जर ज़िले के गाँव लडरावण में, 4 सितंबर 1989 को एक साधारण किसान-मज़दूर परिवार में एक बच्चे ने जन्म लिया। सात बरस की उम्र में माँ का साया उठ गया, और चौदह बरस की उम्र में वह पिता के साथ ₹75 की दिहाड़ी पर ट्रकों से रोड़ी उतारने लगा।
भूख का दर्द वही समझता है, जिसने उसे सहा हो। 2012 में उसने शादियों का बचा भोजन भूखे बच्चों तक पहुँचाने से शुरुआत की, और 2016 में सोशल मीडिया पर लाइव आकर ज़रूरतमंदों के लिए मदद माँगना शुरू किया। लोगों ने ताने दिए, पर हर वीडियो के साथ किसी बेटी की डोली उठी, किसी बहन के आँगन में भात पहुँचा।
आज वही बच्चा हर्ष छिकारा है: बेटियों का भाई, किसानों के धरनों में सबसे आगे खड़ा बेटा, और लाखों लोगों के भरोसे का नाम।
सारी चमक पसीने की है जनाब, विरासत में हमें कोई तिजोरी नहीं मिली।हर्ष छिकारा, अक्टूबर 2021पूरी कहानी पढ़ें
- 1₹75 की दिहाड़ी पर ट्रकों से रोड़ी उतारना
- 2सात बरस की उम्र में माँ का साया उठा
- 3फ़ीस के पैसे तक जुटाना मुश्किल
- 4शादियों का बचा भोजन बाँटती छोटी-सी टीम
- 5ताने: “दिखावा कर रहा है”
- 6न कोई पहचान, न कोई सिफ़ारिश
- 1सैकड़ों लोगों को रोज़गार
- 2हज़ारों माताओं-बहनों का आशीर्वाद
- 3एडवोकेट: एलएल.बी. के बाद क़ानून का पेशा
- 41.2 लाख+ ज़मीनी कार्यकर्ताओं का परिवार
- 519.2 करोड़+ व्यूज़, हर वीडियो एक मदद
- 614,761 मतों का जनादेश (2024)
“अब” दबाकर देखिए, संघर्ष के हर पड़ाव ने क्या बनाया।
कोई गरीब भूखा न सोए, कोई बेटी बिना डोली न रहे
हर ज़रूरत पर एक ही तरीका: मौक़े पर पहुँचना, सोशल मीडिया पर अपील, भाईचारे का दान सीधे परिवार तक, और पूरा हिसाब सार्वजनिक।

कन्यादान
गरीब, अनाथ और बेसहारा बेटियों की शादी: सामान, नकद और पूरा इंतज़ाम।

भाई बनकर भात
जिन बहनों का न भाई था, न पिता, उनके आँगन में मायरा।

कोरोना में राहत
राशन, ऑक्सीजन, प्लाज़्मा और अस्पतालों में बेड।

बाढ़ राहत
पंजाब-हरियाणा के डूबे गाँवों तक लंगर, राहत-सामग्री और डीज़ल।

गौ-सेवा
गौ सेवा सदन में घायल और बेसहारा गौवंश की सँभाल।

रक्तदान
लोगों तक रक्त की आपूर्ति; हर रविवार निःशुल्क आयुर्वेदिक शिविर।
जहाँ टेंट छोटा पड़ जाए
गोहाना में जहाँ टेंट छोटा पड़ जाए, समझ लो हर्ष छिकारा आ रहा है।हर्ष छिकारा, 28 सितंबर 2024








हक़ की हर लड़ाई में सबसे आगे
150 से अधिक जन-आंदोलनों में शांति और संयम के साथ किसानों, जवानों, छात्रों और गाँवों की आवाज़ सरकार तक।
जन-लोकपाल आंदोलन में सक्रिय भूमिका; शादियों के बचे भोजन से भूखे बच्चों की सेवा।
जाट आरक्षण आंदोलन में शांतिपूर्ण नेतृत्व; गिरफ़्तार साथियों के परिवारों के लिए ₹8 लाख।
पुलवामा के बाद 40 शहर बंद का अभियान; टप्पल की मासूम के लिए जंतर-मंतर पर 10 बार आंदोलन।
कृषि क़ानूनों के विरुद्ध दिल्ली बॉर्डर पर डटे; तीनों क़ानून वापस।
अग्निपथ के विरोध में जींद महापंचायत और तालू से पैदल यात्रा।
जंतर-मंतर पर पहलवानों का साथ; मेवात में भाईचारा महापंचायत।
बेटी मनीषा के लिए न्याय की आवाज़; HAU के छात्रों के लिए महापंचायत।
चानौत में 61 दिन का पेयजल आंदोलन और जीत; पिपली की जन-क्रांति रैली।
अख़बारों की सुर्ख़ियों में
अमर उजाला, दैनिक भास्कर, हरिभूमि से लेकर हैदराबाद के डेली हिंदी मिलाप तक। किसी भी कतरन पर क्लिक करके पढ़ें।
इस कारवाँ का हिस्सा बनें
सेवा का हर काम हज़ारों हाथों से होता है। 10–20 रुपये से लेकर अपना समय देने तक, हर योगदान किसी की ज़िंदगी बदलता है।
स्वयंसेवक बनें
अपने गाँव या शहर में टीम हर्ष छिकारा के साथ ज़रूरतमंदों तक मदद पहुँचाइए।
व्हाट्सऐप पर जुड़ेंमदद के लिए संपर्क
किसी बेटी की शादी, इलाज या संकट में फँसे परिवार की जानकारी हमें भेजें।
क्या भेजें, जानेंसोशल मीडिया पर साथ आएँ
हर अपील, हर लाइव और हर कहानी सबसे पहले यहीं आती है।



















